विदर्भप्रान्तसंस्कृतभारती

विदर्भ यह सरकारी दृष्टी से महाराष्ट्र का पूर्व भाग है | इसमें १२ जिले सम्मिलित है | इसकी राजधानी नागपुर है | नागपुर के अतिरिक्त इस प्रदेश में अमरावती अकोला यह दो महानगर है | मुख्य व्यवसाय खेती है | कपास और संतरा यह Cash Crop होते है | खनिज पदार्थ जैसे कोयला होने के कारण यहाँ विद्युत् निर्मिती पर्याप्त मात्रा में होती है | अमरावती जिले में कौण्डिन्यपुर स्थान हजारों वर्षों से विदर्भ राजा की राजधानी रहा है | लोपामुद्रा दमयंती रुख्मिणी इत्यादि विदर्भकन्याये प्रसिद्ध है | अमरावती में शक्तिपीठ है | नागपुर के पास रामटेक नगर में पहाडी पर राम मंदिर है | भगवान् राम अपने वनवास काल में दक्षिण यात्रा के क्रम में वहा टिके थे इसलिये नगर का नाम रामटेक है | नगरधन यह वाकाटकों की राजधानी थी | वहा के राजा के साथ चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) की पुत्री का विवाह हुआ था | राजा की अकाल मृत्यु के पश्चात् छोटे राजकुमार के नाम पर रानी राज्य सँभालने लगी | अनुनभवी रानी का साथ देने के लिए चन्द्रगुप्त ने उज्जैन से एक अनुभवी प्रशासकोंका दल भेजा | उसमे कालिदास भी थे | वे लगभग एक वर्ष वहा रहे होंगे | एक वर्ष के पत्नी विरह के परिणाम स्वरूप कालिदास ने नगरधन से ५ की.मी. पर स्थित रामटेक की पहाडी पर मेघदूत खंडकाव्य की रचना की | चंद्रपुर यह विदर्भ का नगर गोंड राजा की राजधानी रहा | आधुनिक काल में भोसलोंकी राजधानी नागपुर नगर रहा | अंग्रेजोंके काल से भाषानुसार प्रान्त रचना होते तक "मध्यप्रांत और व्हराड" ऐसा इस प्रदेश का नाम था जिसकी राजधानी नागपुर थी | इसमें वर्तमान छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का कुछ हिस्सा विदर्भ के साथ मिला हुआ था | नागपुर यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का केंद्र है | यहाँ पर १९२५ की विजया दशमी को डॉ. हेडगेवार ने संघ प्रारम्भ किया | आज वह विश्व का एक प्रबल संगठन बना है | नागपुर में ही १९५६ के विजया दशमी को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बौद्ध मत की दीक्षा ली | रामटेक में कवी-कुलगुरु-कालिदास-संस्कृत-विश्वविद्यालय विद्यमान है | वहा पारंपरिक और आधुनिक दोनों पाठ्यक्रम उपलब्ध है | नागपुर नगर में और रामटेक में विभाजित इस विश्वविद्यालय में ७० से ऊपर पाठ्यक्रम पढाये जाते है | नागपुर जिले में चार वेद गुरुकुल भी चलते है |

Sambhashan Shibir
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