संस्कृत भारती हजारीबाग के द्वारा गीता जयन्ती समारोह का आयोजन
आज दिनांक 15/12/2024 को संस्कृत भारती हजारीबाग के द्वारा गीता जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निबन्ध प्रतियोगिता और श्लोक व्याख्यान् प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबन्ध प्रतियोगिता में संत कोलम्बा महाविद्यालय के प्रशान्त कुमार पाण्डेय को प्रथम, के बी महिला महाविद्यालय की ज्योत्स्ना माही द्वितीय और विभावि संस्कृत विभाग की अदिति नमामि को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। श्लोक व्याख्यान् प्रतियोगिता में के बी महिला महाविद्यालय की ज्योत्स्ना माही प्रथम, रीति कुमारी द्वितीय और विभावि संस्कृत विभाग की शिवानी कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अन्य सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर संस्कृत गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन के बी महिला महाविद्यालय के संस्कृत शिक्षक श्री पुरूषोत्तम कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण और सरस्वती वन्दना के द्वारा किया गया। संत कोलम्बा महाविद्यालय के संस्कृत शिक्षक डॉ सुबोध कुमार साहू ने विषय प्रवेश करते हुए बताया कि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त जगत् को गीता उपदेश दिया जो मानवमात्र की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है। अतः गीता ज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए और उसमें प्रीति के लिए गीता जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया है। यह समारोह सभी प्रतिभागियों एवं आगंतुकों के लिए एक नया मोड़ लेकर आएं और लोग सन्मार्ग के पथ पर चलें। के बी महिला महाविद्यालय के सेवानिवृत्त संस्कृत प्राध्यापक डॉ रामप्यारे मिश्र ने प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थी गीता के श्लोकों का पठन, मनन और चिंतन करें यह आपके जीवन के मार्ग का पथ प्रदर्शक सिद्ध हो यही आशा है। विभावि संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और संस्कृत भारती के जिलाध्यक्ष डॉ नकुल पाण्डेय ने अध्यक्षीय उद्बोधन और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि संस्कृत भारती का प्रयास है कि अधिकाधिक संख्या में समाज को संस्कृत का ज्ञान हो। संस्कृत आज जनमानस में अपना स्थान पुनः बनाते जा रही है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने मानवों को आत्मप्रबंधन का मार्ग दिखाया है साथ ही ज्ञान योग, भक्ति योग और कर्म योग से मोक्ष मार्ग का पथ प्रशस्त किया है। सम्पूर्ण मानव समाज को गीता ज्ञान का आश्रय लेना चाहिए। इस अवसर पर संस्कृत भारती के जिला संयोजक श्री अखौरी रवीन्द्र प्रसाद ने बताया कि गीता के ज्ञान को आत्मसात् करने से व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में नहीं घबराता है अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है और जीवन को सफल बनाने में अग्रसर होता है। अतः गीता का अभ्यास आवश्यक है। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षक विरेन्द्र मिश्र, अनुप कुमार तिवारी, गौरियाकरमा विद्यालय के संदीप मिश्र एवं प्रवीण कुमार ने भी अपने वक्तव्य रखे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सुधांशु कुमार शर्मा, बिरेंद्र कुमार महतो आदि ने अपनी अभूतपूर्व भूमिका निभाई।.
- Post By : Jharkhand
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- 15-12-2024
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