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संस्कृत भारती द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय प्रबोधन वर्ग का समापन समारोह
संस्कृत भारती, बोकारो, झारखंड
संस्कृत भारती द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय संस्कृत कार्यक्रम का समापन समारोह दिनांक 30-12-24 को रात्रि 06:00 बजे संपन्न हुआ। आगत अतिथियों का परिचय संस्कृत भारती धनबाद विभाग संयोजक डा० विनय कुमार पाण्डेय के द्वारा किया गया ।स्वागत भाषण संस्कृत भारती बोकारो के जिला अध्यक्ष डा० रामनारायण सिंह के द्वारा किया गया। संचालन श्री सर्वेश मिश्रा(प्रबोधन वर्ग के मुख्य शिक्षक) और धन्यवाद ज्ञापन श्री सत्यदेव तिवारी ने किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डा० एस. के. शर्मा, पूर्व कुलपति रामचंद्र चंद्रवंशी विश्वविद्यालय, गढ़वा ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत पूरे दुनिया की भाषाओं की जननी है। अद्यतन शोध अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि देव भाषा संस्कृत वेद काल में पूरी दुनिया में थी। आर्य संस्कृति के साथ भाषा ने भी गमन किया और कालक्रम में क्षेत्रिय प्रभाव में परिवर्तन की यात्रा से सभी भाषाओं का भिन्न-भिन्न स्वरूप निर्मित हुआ। भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाएं भी संस्कृत शब्दों के अधिकतम प्रयोग से परिपूरित है। मूल रूप के साथ क्षेत्रीय समन्वय ने शब्दों की भिन्नता का निर्माण किया है। अतः सारी भारतीय भाषाओं को एक सूत्र में पिरोने का काम भी संस्कृत सबसे सफल रूप में कर सकती है। अतः संस्कृत का विकास राष्ट्रीय विकास का पर्याय बन सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर परमेश्वर लाल बरनवाल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृत सकारात्मक विचारों की सरिता है। संस्कृत के उच्चारण, पाठन और लेखन से मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगों का जन्म होता है जो जीवन के लिए काफी लाभप्रद है। संस्था के संरक्षक श्री भागीरथ शर्मा ने मौके पर प्रस्तुत शिक्षार्थियों के अनुभव कथन, नाट्य प्रदर्शन और दैनिक व्यवहार में संस्कृत के प्रदर्शन को अभूतपूर्व बताया और हौसला अफजाई करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज के लिए दिशा देने वाले हैं। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रोफेसर सत्यदेव तिवारी ने झारखंड के 14 जिले से आए प्रशिक्षणार्थियों को हार्दिक आभार जताया। प्रशिक्षण के लिए आए सभी लोगों की सहभागिता को अनुकरणीय कहा और इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए संस्कृत भारती को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रांत मंत्री पृथ्वीराज सिंह जी को कोटि-कोटि बधाई दी। कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता गान, सरस्वती वंदना और स्वस्तिवाचन के सस्वर मंत्र से हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मुख्य रूप से डॉक्टर भगवान पाठक, श्री संजय झा,संदीप तिवारी,डॉ विनय कुमार पाण्डेय,डॉक्टर रंजीत कुमार झा, डॉ शशिकांत पाण्डेय, कुमार गौरव जी, विपुल कुमार, श्री उदित पांडेय, श्री देवनाथ मिश्र,श्री राम बच्चन सिंह, श्री राम भरोसे गिरी, श्री शंकर स्वर्णकार, कृष्ण कुमार की विशेष उपस्थिति रही। इति शुभम्.


  • Post By : Jharkhand
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  • 05-01-2025
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